पूर्व ISRO वैज्ञानिक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका द्वारा स्थापित स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 मिशन के जरिए भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
नई दिल्ली। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने विक्रम-1 मिशन के साथ एक नया इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के केंद्र में हैं पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका, जिन्होंने 2018 में स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) की स्थापना कर भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में निजी भागीदारी को नई दिशा दी।
दोनों संस्थापक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर चुके हैं। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने छोटे उपग्रहों के लिए किफायती और तेज़ लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा।
विक्रम-1 ने रचा इतिहास
विक्रम-1 मिशन, जिसे “मिशन आगमन” नाम दिया गया, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसने कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पेलोड को लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया।
इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी क्षेत्र ने ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है।
ISRO से स्टार्टअप तक का सफर
पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने ISRO में लॉन्च व्हीकल तकनीक पर काम करने के बाद निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अवसरों को देखते हुए Skyroot Aerospace की शुरुआत की। 2020 में भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद स्काईरूट ने तेजी से तकनीकी और व्यावसायिक प्रगति की।
इससे पहले 2022 में कंपनी ने विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण कर भारत की पहली निजी अंतरिक्ष उड़ान का रिकॉर्ड भी बनाया था।
भारत के स्पेस इकोसिस्टम के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
विशेषज्ञों के अनुसार विक्रम-1 मिशन केवल एक सफल रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के उभरते निजी अंतरिक्ष उद्योग की क्षमता का प्रदर्शन है। इससे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण, वैश्विक व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं और स्पेस टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि को भारत के अंतरिक्ष अभियान और आत्मनिर्भरता की दिशा में नया अध्याय बताया तथा स्काईरूट टीम को बधाई दी।
