रायपुर में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण, आधुनिक तकनीक और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन की मजबूत आधारशिला है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को राजधानी रायपुर में आयोजित ‘किसान और किसानी-प्रोत्साहन तथा परिणाम’ विषयक संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट खेती, नवाचार और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान परिवार से जुड़े होने के कारण उन्होंने खेती की कठिनाइयों और किसानों की जरूरतों को करीब से देखा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से किए गए वादों को पूरा कर रही है और आज छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है जहां किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है। सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान की खरीदी कर रही है तथा लंबित बोनस का भुगतान भी किया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ विपणन सीजन में प्रदेश के करीब 25 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली।
मुख्यमंत्री ने किसानों से केवल धान पर निर्भर न रहने और दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी जैसी फसलों की खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ आदान सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसानों की आय के अनेक स्रोत विकसित हो सकें।
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नई सिंचाई परियोजनाओं, बैराज, एनीकट और नहर विस्तार के माध्यम से अधिक से अधिक खेतों तक पानी पहुंचाने का काम कर रही है। किसानों को सोलर सिंचाई पंप, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों तथा आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव बैराज के निर्माण पर लगभग 2 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना के लिए लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्निर्माण एवं सुधार के लिए भी करीब 2800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद कमजोर होने के बाद बस्तर में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। सुरक्षा शिविरों को सेवाडेरा के रूप में विकसित कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए महिलाएं ड्रोन दीदी बनकर नैनो डीएपी का छिड़काव कर रही हैं और बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।
नई उद्योग नीति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक प्रदेश में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश संबंधी समझौते (एमओयू) हुए हैं। सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विकास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के क्षेत्र में भी तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य में आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थान संचालित हैं, जबकि रेलवे और स्वास्थ्य सेवाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, नई दुनिया समाचार पत्र के संपादक सतीश चंद्र श्रीवास्तव, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
