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खत्म हो कोचिंग संस्थानों की ‘फीस-ट्रैप’ व्यवस्था : बृजमोहन अग्रवाल

नई दिल्ली/रायपुर । देशभर के छात्रों को निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी से राहत दिलाने के लिए रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने लोकसभा में नियम 377 के तहत केंद्र सरकार से अपील की कि कोचिंग संस्थानों द्वारा अपनाई जा रही “फीस-ट्रैप” प्रथा को समाप्त किया जाए और शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस 2024 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

सांसद अग्रवाल ने कहा कि देश के लाखों छात्र आईआईटी, एनआईटी, एम्स, यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं। इन संस्थानों द्वारा गारंटीड चयन का लालच देकर छात्रों और उनके अभिभावकों से एकमुश्त भारी फीस वसूली जाती है। गरीब, ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों के भविष्य के लिए कर्ज लेकर, जमीन या गहने बेचकर यह फीस चुकाते हैं।

उन्होंने बताया कि यदि किसी छात्र को पढ़ाई का अनुकूल माहौल नहीं मिलता और वह बीच में कोचिंग छोड़ना चाहता है, तो अधिकांश संस्थान फीस लौटाने से इनकार कर देते हैं। इससे छात्र और उनके अभिभावक मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित होते हैं। यह समस्या केवल स्कूली छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यूपीएससी जैसे प्रोफेशनल एग्जाम की तैयारी करने वाले युवाओं के साथ भी दिल्ली सहित बड़े शहरों में यही स्थिति देखने को मिलती है।

सांसद अग्रवाल ने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में कोचिंग संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए उनका संसदीय कार्यालय चौबीसों घंटे उपलब्ध है।

सरकार से सांसद अग्रवाल के प्रमुख आग्रह:
यदि कोई छात्र बीच में कोचिंग संस्थान छोड़ता है, तो 10 दिनों के भीतर फीस रिफंड को अनिवार्य करने का नियम सभी राज्यों में लागू किया जाए।
कोचिंग संस्थानों से जुड़े विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक राज्य में फास्ट ट्रैक निवारण सेल की स्थापना की जाए।
गाइडलाइंस 2024 का देशभर में कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

सांसद अग्रवाल ने यह भी कहा कि रायपुर और दुर्ग-भिलाई तेजी से “मध्य भारत के कोटा” के रूप में उभर रहे हैं, वहीं बिलासपुर और रायगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म्स का विस्तार हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही स्कूली विद्यार्थी कोचिंग संस्थानों की फीस-ट्रैप और एकाधिकार व्यवस्था के शिकार बनते जा रहे हैं, जिसे रोकना बेहद जरूरी है।

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