रायपुर स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम) में ब्रह्माकुमारीज़ के ‘इको केयर एंड डिजास्टर मैनेजमेंट’ अभियान के अंतर्गत तनाव प्रबंधन एवं प्रकृति संरक्षण विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं जल बचाने का संकल्प भी लिया।
रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर में ब्रह्माकुमारीज़ के वैज्ञानिक एवं अभियंता प्रभाग द्वारा संचालित ‘इको केयर एंड डिजास्टर मैनेजमेंट’ अभियान के तहत ‘तनाव प्रबंधन एवं प्रकृति संरक्षण’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मानसिक सुदृढ़ता को बताया वास्तविक शक्ति का आधार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारीज़ के वरिष्ठ राजयोगी एवं वैज्ञानिक एवं अभियंता प्रभाग के दिल्ली जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. पीयूष गोयल ने कहा कि वास्तविक शक्ति का आधार आंतरिक संतुलन और मानसिक सुदृढ़ता है। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से सशक्त व्यक्ति जीवन की चुनौतियों और आपदाओं का बेहतर ढंग से सामना कर सकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपनी क्षमताओं को पहचानने, स्वयं की सराहना करने और सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार सकारात्मक एवं श्रेष्ठ विचार मानसिक ऊर्जा बढ़ाते हैं और तनाव को कम करने में सहायक होते हैं।
पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संदेश
डॉ. गोयल ने प्रकृति को मानव जीवन का आधार बताते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग से बचने और जल संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जल प्रकृति का अमूल्य संसाधन है और इसकी प्रत्येक बूंद का संरक्षण आवश्यक है।
वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने ली सामूहिक शपथ
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण तथा जल बचाने की सामूहिक शपथ ली और सतत एवं उत्तरदायी जीवनशैली अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय, संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित, डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. डेज़ी बंसदराय सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर निदेशक डॉ. पी.के. राय ने डॉ. पीयूष गोयल के व्याख्यान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक जीवन मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
