अपराध और हादसाछत्तीसगढ़

रायपुर में बड़ा हादसा: तीन सफाई कर्मियों की मौत, 24 घंटे बाद भी FIR नहीं

रायपुर। रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के सीवरेज टैंक की सफाई के लिए उतरे तीन मजदूरों की मौत के 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज तक नहीं किया है. एफआईआर दर्ज नहीं हुआ है तो किसी की गिरफ्तारी का सवाल ही पैदा नहीं होता है. इस बीच मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गटर में उतारकर हत्या करने का आरोप लगाया है.
टिकरापारा थाना से मिली जानकारी के मुताबिक, तीनों मजदूरों की मौत के मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है, लिहाजा अब तक किसी की गिरफ्तारी भी नहीं हुई है. इस बीच मृतक मजदूरों के परिजन अस्पताल को बंद कर जिम्मेदारों को गिरफ़्तार करने की माँग कर रहे हैं. सवाल यह है कि कहीं मुआवज़े के मरहम से इस मामले को दफ़नाने की कहीं तैयारी तो नहीं की जा रही है.

बता दें कि ऐसा ही ठीक गटर कांड अशोका बिरियानी में हुआ था. वहां गटर में उतारने से दो लोगों की मौत हुई थी. मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद दोषियों को गिरफ्तार भी किया गया था. इसके बाद प्रबंधन की ओर से मृतक के परिजनों को मुआवजा राशि दी गई थी. तब परिजनों के साथ विधायक भी हड़ताल में बैठे थे. उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा आधी रात को घटना स्थल अशोका बिरियानी पहुँचे थे.

सुध लेने नहीं पहुंचा कोई जनप्रतिनिधि
लेकिन रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल मैं तीन मजूदरों की मौत हो गई, लेकिन कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा. ऊपर से 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है. जब भी कहीं मौत होती है, तो स्थल से पुलिस की ज़िम्मेदारी होती है, शवों को पुलिस अपनी कस्टडी में लेती है. पंचनामा करना, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के लिए. लेकिन राम कृष्ण केयर हॉस्पिटल में इस अस्पताल के कर्मचारी अस्पताल के वैन में बग़ैर पुलिस हॉस्पिटल से रातों रात लाशों को ग़ायब कर देता है.

क्या पुलिस की है मिलीभगत?
सुबह लाश पोस्टमार्टम केंद्र में मिलती है, तो क्या इसमें पुलिस की भी मिलीभगत है? किसके कहने पर लाश को रातों-रात हॉस्पिटल से ग़ायब किया गया? इस मामले में पुलिस मौन क्यों हैं? अगर पुलिस की जानकारी के बग़ैर लाशों को शिफ़्ट किया गया है, तो पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की?

कांग्रेस प्रवक्ता ने लगाया मामले में लीपापोती का आरोप
कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के सीवरेज टैंक को साफ़ करते हुए तीन लोगों की मौत मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए कहा तीन लोगों की मौत बहुत ही दुर्भाग्यजनक है. इस मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए कि क्या ये तीनों मृतक ठेकेदार के अधीन कार्यरत थे? या फिर ये हॉस्पिटल से जुड़े हुए लोग हैं? या ऐसे ही बाहर से बुलाकर इनसे काम कराया गया था?

अभी तक क्यों दर्ज नहीं हुआ एफआईआर?
इसके साथ ही सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रातों-रात लाशों को हॉस्पिटल प्रबंधन ने किससे पूछकर ग़ायब किया? पुलिस की ज़िम्मेदारी होती है लाश को कस्टडी में लेकर पंचनामा बनाए, पोस्टमार्टम कराए, फिर परिजनों को सौंपे, लेकिन यहाँ हॉस्पिटल की गाड़ी में हॉस्पिटल के कर्मचारी पीछे के गेट से चुपचाप लाश को भरकर ग़ायब हो गए. घटना को लगभग 24 घंटे हो गए हैं, लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुआ?

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