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प्रधानमंत्री मोदी एम्स्टर्डम पहुंचे, भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी शनिवार को एम्स्टर्डम पहुंचे। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से हो रहा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश संबंध में लगातार विस्तार हो रहा है।

नीदरलैंड की राजधानी में उतरने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने कहा कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की प्रक्रिया ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गति प्रदान की है और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोले हैं।

श्री मोदी ने कहा, एम्स्टर्डम पहुंच गया हूं। नीदरलैंड की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते ने व्यापार और निवेश संबंधों को काफी बढ़ावा दिया है। यह सेमीकंडक्टर, जल, स्वच्छ ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह अपनी यात्रा के दौरान नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से बातचीत करेंगे और राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह 16 मई की सुबह होने वाले एक कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करने के लिए उत्सुक हैं।

उन्होंने कहा कि नीदरलैंड यूरोप में भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में से एक है और देश में विदेशी निवेश का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है। द्विपक्षीय सहयोग पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, कृषि और सेमीकंडक्टर विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में लगातार विस्तारित हो रहा है।

यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ द्वारा लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयासों के बीच हो रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों के मद्देनजर, दोनों पक्ष बाजार पहुंच बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के लिए बातचीत को गति दे रहे हैं।

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में, भारत और नीदरलैंड ने स्वच्छ ऊर्जा पहलों, हरित हाइड्रोजन विकास और उच्च-प्रौद्योगिकी साझेदारियों पर मिलकर काम किया है, जो महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों में यूरोपीय साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए नयी दिल्ली के व्यापक प्रयासों को दर्शाता है।

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