नई दिल्ली। संवाददाता: भारत और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की।

बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सह-विकास, सैन्य-तकनीकी सहयोग और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने “डिज़ाइन विद जापान, मेक इन इंडिया” की रूपरेखा के तहत जापान की तकनीकी क्षमता और भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमता को जोड़ने पर जोर दिया।
समुद्री सुरक्षा सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल पर चर्चा की। भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF) के बीच वास्तविक समय के मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA), खोज एवं बचाव अभियानों और आपदा राहत गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
इस सहयोग का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं के आदान-प्रदान और दोनों देशों की संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है।
UNICORN प्रोजेक्ट पर भी हुई चर्चा
बैठक में जापान की उन्नत UNICORN (यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना) तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट की भी समीक्षा की गई।
दोनों देशों ने भारतीय नौसैनिक जहाजों पर जापान के UNICORN मास्ट को एकीकृत करने की परियोजना की प्रगति पर चर्चा की। यह पहल दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक और नौसैनिक क्षमताओं में सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
जापान की तकनीक और भारत की पोत निर्माण क्षमता का तालमेल
भारत और जापान ने नौसैनिक जहाजों के डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। इसके तहत जापान की उन्नत तकनीकी एवं डिजाइन क्षमताओं को भारत की घरेलू पोत निर्माण क्षमता के साथ जोड़कर रक्षा उत्पादन को गति देने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
इससे भारत में रक्षा विनिर्माण और स्वदेशी उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
धर्म गार्जियन और JIMEX का बढ़ेगा दायरा
दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को भी विस्तार देने पर सहमति बनी। धर्म गार्जियन और JIMEX जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दायरे को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा वीर गार्जियन 26 अभ्यास की तैयारियों की भी पुष्टि की गई। इस अभ्यास में जापानी लड़ाकू विमानों के भारत में शामिल होने की योजना है।
विशेष बलों के बीच प्रशिक्षण सहयोग
भारत और जापान के विशेष बलों के बीच सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों के विशेष बलों के बीच प्रशिक्षण और अनुभवों के आदान-प्रदान को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के उभरते थिएटर कमांड्स के साथ भविष्य में संस्थागत समन्वय की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक पर जोर
बैठक के दौरान भारत और जापान ने स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों पक्षों ने क्षेत्र में यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करने की बात कही। ऐसे में रक्षा सहयोग को दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
मुंबई में नौसेना की क्षमताओं का लिया जायजा
नई दिल्ली में औपचारिक वार्ता से पहले जापानी रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा किया।
इस दौरान उन्होंने गौरव स्तंभ पर श्रद्धांजलि अर्पित की और स्वदेशी गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक INS चेन्नई का निरीक्षण किया।
जापानी रक्षा कंपनियों और स्टार्टअप्स को भारत आने का न्योता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के दौरान जापानी रक्षा उद्योग और स्टार्टअप्स की भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र में भागीदारी पर भी चर्चा हुई।
भारत ने जापानी रक्षा कंपनियों और स्टार्टअप्स को देश के बढ़ते रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलने की संभावना है।
