रायपुर। कुछ स्वाद ऐसे होते हैं जो केवल जीभ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पीढ़ियों की यादों का हिस्सा बन जाते हैं। राजधानी रायपुर का ‘स्वीट इंडिया’ ऐसा ही एक प्रतिष्ठान है, जिसने अपने स्वाद, शुद्धता और ग्राहकों के विश्वास के दम पर शहर में एक अलग पहचान बनाई है। गोतीबाग स्थित बंजारी वाले बाबा की मजार के पास संचालित यह प्रतिष्ठान पिछले चार दशकों से मिठाइयों और नाश्ते के बेमिसाल स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
दुकान में प्रवेश करते ही ताजी मिठाइयों की खुशबू ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां की इमरती, जलेबी, फाफड़ा, समोसा और अन्य पारंपरिक व्यंजन वर्षों से लोगों की पसंद बने हुए हैं। हर पकवान में तीन पीढ़ियों की मेहनत, अनुभव और ग्राहकों के प्रति ईमानदारी की झलक साफ दिखाई देती है।
‘स्वीट इंडिया’ के संचालक संजय वीरनानी बताते हैं कि इस प्रतिष्ठान की नींव उनके दादाजी स्वर्गीय भीमसेन वीरनानी ने वर्ष 1963 में रखी थी। उस समय कटोरा तालाब स्थित नेताजी चौक के पास एक छोटी सी टपरी में ‘भीमसेन होटल’ के नाम से चाय और भजिया बेचे जाते थे। धीरे-धीरे वहां समोसा, आलूगुंडा, मिर्ची भजिया और जलेबी भी मिलने लगी। उस दौर में कवर्धा बाड़ा स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज के छात्र और शहर के कई लोग वहां नाश्ते के लिए पहुंचते थे। करीब 22 वर्षों तक टपरी से यह सफर जारी रहा।
संजय बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय गिरधारी लाल वीरनानी और चाचाजी स्वर्गीय बुधरामल वीरनानी ने भी वर्ष 1963 में ही बंजारी वाले बाबा की मजार के पास खपरैल की दुकान में ‘स्वीट इंडिया’ की शुरुआत की थी। शुरुआत केवल चाय से हुई, लेकिन बाद में भजिया और समोसे भी बनने लगे। जल्द ही यहां के समोसे पूरे शहर में मशहूर हो गए।
वर्ष 1995 में दुकान को पक्का स्वरूप दिया गया और व्यवसाय का विस्तार करते हुए मिठाइयों के साथ दूध, दही, पनीर, खोवा, मिक्सचर और बेकरी उत्पाद भी शामिल किए गए। संजय वीरनानी के अनुसार, उनके पिता और चाचाजी ने दिन-रात मेहनत कर इस प्रतिष्ठान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वर्तमान में वे अपने छोटे भाई नरेश वीरनानी के साथ इसका संचालन कर रहे हैं।
स्वीट इंडिया का खस्ता समोसा इसकी सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। विशेष विधि से तैयार किए जाने वाले इस समोसे में खजूर डालडा का उपयोग किया जाता है और इसे सनफ्लावर तेल में तला जाता है, जिससे इसका स्वाद और खस्तापन दोनों बढ़ जाते हैं। सुबह के समय समोसा, कचौड़ी, ढोकला और गर्म जलेबी के लिए यहां ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है।
संजय बताते हैं कि उनके पिता हमेशा एक ही सीख देते थे—“गुणवत्ता से कभी समझौता मत करो, ग्राहकों को हमेशा शुद्ध और बेहतर उत्पाद दो।” यही कारण है कि आज भी प्रतिष्ठान में स्वच्छता, हाइजीन और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
स्वर्गीय गिरधारी लाल वीरनानी केवल सफल व्यवसायी ही नहीं, बल्कि समाज और व्यापार जगत के सक्रिय नेतृत्वकर्ता भी थे। उन्होंने वर्ष 2006 में रायपुर स्वीट्स एसोसिएशन की स्थापना की और अपने निधन तक इससे जुड़े लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करते रहे।
आज ‘स्वीट इंडिया’ का पनीर राजधानी के कई बड़े रेस्टोरेंट्स तक पहुंचता है और एक अलग ब्रांड के रूप में पहचान बना चुका है। वहीं खजूर गुड़ से बनी मिष्टी दही, कुल्हड़ केसर लस्सी, दहीबड़ा और शुद्ध खोवा भी ग्राहकों की पसंदीदा सूची में शामिल हैं। मिठाइयों में काजू कतली, कलाकंद, रबड़ी, रसमलाई, अंजीर रोल, केसर पेड़ा, रसगुल्ला और देसी घी के बेसन लड्डू की विशेष मांग रहती है।
तीन पीढ़ियों की मेहनत, गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता और ग्राहकों के भरोसे ने ‘स्वीट इंडिया’ को केवल एक मिठाई दुकान नहीं, बल्कि रायपुर की स्वाद विरासत का अहम हिस्सा बना दिया है।
