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चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा बना सरकार की चिंता, 2025 में 106 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

अमेरिका। भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाए जाने के बाद सरकार ने निर्यातकों के लिए वैकल्पिक बाजार तलाशने की रणनीति अपनाई। इसी क्रम में चीन सहित अन्य देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश की गई और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए गए। हालांकि, ताजा आंकड़ों ने सरकार की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है और 2025 में इसके 106 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की आशंका है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन को भारत का निर्यात 2021 में 23 अरब डॉलर था, जो 2024 में घटकर 15.1 अरब डॉलर रहा और 2025 में इसके 17.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके विपरीत, चीन से भारत का आयात तेजी से बढ़कर 2025 में 123.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, चीन से भारत के करीब 80 प्रतिशत आयात इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, ऑर्गेनिक केमिकल्स और प्लास्टिक जैसे चार क्षेत्रों में केंद्रित हैं, जो भारत की औद्योगिक निर्भरता को दर्शाता है। वहीं सरकार का कहना है कि यह घाटा मुख्य रूप से कच्चे माल, मध्यवर्ती और पूंजीगत वस्तुओं के आयात के कारण है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने आयात-निर्यात रुझानों की समीक्षा के लिए अंतर-मंत्रालयी समिति गठित करने की बात कही है। बढ़ते निर्यात के बावजूद चीन के साथ व्यापार घाटा भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बना हुआ है।

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