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स्वागत से शुरू होती शिक्षा, खेल-गीतों से संवर रहा नौनिहालों का भविष्य; बलरामपुर का आंगनबाड़ी केंद्र बना मिसाल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा और बाल विकास के समग्र केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बलरामपुर जिले के स्कूल पारा भनौरा आंगनबाड़ी केंद्र में स्वागत चार्ट, खेल-आधारित शिक्षण और पौष्टिक आहार जैसी नवाचारी पहलें बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण केंद्र तक सीमित न रखकर प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और बाल विकास के समग्र केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में नवाचार आधारित गतिविधियों के जरिए बच्चों को सुरक्षित, आनंदमय और सीखने के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसी दिशा में बलरामपुर जिले के स्कूल पारा भनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र ने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह केंद्र बच्चों के लिए सीखने, खेलने, संवाद करने और आत्मविश्वास विकसित करने की पहली पाठशाला बनकर उभरा है।

स्वागत चार्ट से बढ़ रहा बच्चों का आत्मविश्वास

केंद्र की सबसे खास पहल ‘स्वागत चार्ट’ है। आंगनबाड़ी पहुंचने वाला प्रत्येक बच्चा चार्ट पर बने चित्रों में से अपनी पसंद का स्वागत तरीका चुनता है। इनमें गले मिलना, ताली देना, हाथ मिलाना, मुट्ठी मिलाना, कोहनी मिलाना और नमस्ते जैसे विकल्प शामिल हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चे की पसंद के अनुसार उसका स्वागत करती हैं।

इस पहल से बच्चों का संकोच कम हो रहा है, वे स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहे हैं और केंद्र में खुशी-खुशी भागीदारी कर रहे हैं। इससे उनके सामाजिक व्यवहार, संवाद कौशल और भावनात्मक विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।

खेल-गीतों के जरिए आसान हो रही पढ़ाई

केंद्र में प्रतिदिन प्रार्थना, स्वागत गीत, कहानी-कथन, समूह गतिविधियां, चित्र पहचान, रंग पहचान, अक्षर एवं अंक ज्ञान जैसी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। पारंपरिक रटने की बजाय खेल-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई गई है, जिससे बच्चे सहज और आनंददायक तरीके से नई बातें सीख रहे हैं।

गीत, कविता और रचनात्मक खेलों के माध्यम से बच्चों का मानसिक, भाषाई, सामाजिक और बौद्धिक विकास तेजी से हो रहा है। साथ ही उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और समूह में कार्य करने की आदत भी विकसित हो रही है।

पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

आंगनबाड़ी केंद्र में निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को पौष्टिक नाश्ता और गर्म पका हुआ मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाता है। बच्चों के वजन, ऊंचाई और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाती है। साथ ही गर्भवती एवं धात्री माताओं को संतुलित आहार, टीकाकरण, स्तनपान और शिशु देखभाल संबंधी जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है।

बच्चों का दूसरा घर बना आंगनबाड़ी केंद्र

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका बच्चों के लिए परिवार जैसा स्नेहपूर्ण और सुरक्षित माहौल तैयार करती हैं। आंगनबाड़ी में अध्ययनरत बालिका सौम्या की माता श्रीमती सोनम सोनी का कहना है कि स्वागत चार्ट, खेल-आधारित शिक्षा और आत्मीय व्यवहार के कारण बच्चे अब खुशी-खुशी केंद्र जाते हैं और घर लौटकर दिनभर सीखी गई बातें उत्साहपूर्वक साझा करते हैं।

प्रदेश में संचालित ऐसी नवाचारी गतिविधियां यह साबित कर रही हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण केंद्र नहीं, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और सामाजिक विकास के सशक्त केंद्र बनते जा रहे हैं।

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