अपराध और हादसाछत्तीसगढ़

अवैध रेत कारोबार पर बड़ी कार्रवाई, पलारी में 9 ट्रैक्टर जब्त

बलौदाबाजार। जिले में अवैध रेत कारोबार के खिलाफ राजस्व विभाग ने बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए पलारी क्षेत्र में अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे 9 ट्रैक्टरों को जब्त किया है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद की गई इस कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है। हालांकि, एक ओर जहां राजस्व विभाग की इस कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर मांड नदी क्षेत्र में धड़ल्ले से जारी अवैध रेत खनन और परिवहन पर खनिज विभाग की चुप्पी को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, पलारी राजस्व विभाग की टीम ने विशेष छापेमारी अभियान चलाते हुए अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रहे 9 ट्रैक्टरों को मौके पर ही जब्त किया। सभी जब्त वाहनों को नियमानुसार अभिरक्षा में लेकर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध रेत खनन और परिवहन को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिन पर संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की गई।
एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद जारी अवैध खनन
गौरतलब है कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 10 जून से नदी-नालों से रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। प्रतिबंध अवधि में रेत का खनन, भंडारण और परिवहन आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद बलौदाबाजार जिले के ग्राम प्रतापगढ़ स्थित मांड नदी से अवैध रेत खनन और भंडारण बड़े पैमाने पर जारी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रेत कारोबारी बिना किसी वैध अनुमति के मांड नदी से रेत की खुदाई कर रहे हैं और उसे ग्राम प्रतापगढ़ के बाजारडांड़ क्षेत्र में खुलेआम भंडारित किया जा रहा है। इस भंडारण के लिए खनिज विभाग से कोई वैधानिक अनुमति नहीं ली गई है, जबकि नियमानुसार भंडारण स्थल का निर्धारण और अनुमति खनिज विभाग द्वारा तय मापदंडों के आधार पर दी जाती है।
रात के अंधेरे में खपाई जा रही रेत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन के उजाले में ट्रैक्टरों के माध्यम से नदी से रेत निकालकर भंडारण किया जाता है और फिर देर रात जेसीबी मशीनों से हाइवा और टिपर वाहनों में रेत भरकर बाहर खपाया जाता है। इन भारी वाहनों को त्रिपाल से ढंक दिया जाता है ताकि किसी की नजर न पड़े। इस पूरे अवैध कारोबार से सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
मांड नदी के अस्तित्व पर खतरा
प्रतापगढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों में इस अवैध रेत खनन को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जिस तरह मांड नदी से लगातार रेत निकाली जा रही है, उससे इस जीवनदायिनी नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। नदी में जगह-जगह गहरे और खतरनाक गड्ढे बन गए हैं, जो खासकर बारिश के मौसम में जानलेवा साबित हो सकते हैं।
रेत खनन के गड्ढे में डूबने से बालक की मौत
स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते वर्ष प्रतापगढ़ क्षेत्र में मांड नदी में रेत खनन के लिए खोदे गए गड्ढे में एक बालक की डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अवैध खनन पर कोई ठोस रोक नहीं लगाई गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि मांड नदी में अवैध रेत खनन और परिवहन पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल खनिज विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनिज विभाग को अवैध रेत खनन और परिवहन की पूरी जानकारी होने के बावजूद वह रसूखदार रेत कारोबारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। आरोप यह भी है कि विभाग केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रेत ढुलाई करने वाले गरीब ट्रैक्टर मालिकों पर कार्रवाई कर अपनी वाहवाही करता है, जबकि बड़े माफियाओं के हाइवा और टिपर वाहनों को पकड़ने में अधिकारियों के हाथ कांप जाते हैं। इस पूरे मामले पर रामसिंह ठाकुर, एसडीएम, ने कहा है कि शिकायतें सामने आई हैं और मामले की गंभीरता से जांच कर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अवैध रेत खनन और परिवहन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button