रायपुर। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एम्स रायपुर ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए तीन दिवसीय चौथे वार्षिक कार्डियोवैस्कुलर इमरजेंसीज़ सिम्पोज़ियम (ACES 2026) का सफल आयोजन किया। रविवार को संपन्न हुए इस सम्मेलन ने न केवल चिकित्सा जगत में अकादमिक विमर्श को नई दिशा दी, बल्कि एम्स रायपुर को हृदय आपातकालीन देखभाल के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित किया।
उद्घाटन सत्र में कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने आपात स्थितियों में समय की अहम भूमिका पर जोर देते हुए “समय-संवेदनशील” प्रशिक्षण को अत्यंत आवश्यक बताया। डीन (अकादमिक्स) डॉ. एली मोहापात्रा और डीन (रिसर्च) डॉ. अभिरुचि गलहोत्रा ने इमरजेंसी मेडिसिन में शोध, त्वरित निर्णय और बेडसाइड मैनेजमेंट के महत्व को रेखांकित किया।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण इंडूसेम, फ्लोरिडा (अमेरिका) के अध्यक्ष डॉ. सागर गलवांकर का कीनोट व्याख्यान रहा, जिसमें उन्होंने भारत में हृदय रोगों की चुनौतियों और भविष्य की तकनीकों पर प्रकाश डाला। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) देवेन्द्र के. त्रिपाठी ने बताया कि सम्मेलन का फोकस त्वरित पहचान और शीघ्र उपचार पर आधारित रहा।
व्यावहारिक कार्यशालाओं में रियल-टाइम कार्डियक असेसमेंट, ईसीजी व्याख्या और नर्सिंग स्टाफ के लिए विशेष सत्र शामिल रहे। आयोजन सचिव डॉ. नमन अग्रवाल के अनुसार देशभर से 120 से अधिक चिकित्सक, रेजिडेंट्स और नर्सिंग प्रोफेशनल्स ने इसमें भाग लिया।
