मुंबई। संवाददाता: रेणुका शहाणे का नाम आते ही दर्शकों के सामने ‘हम आपके हैं कौन’ की संस्कारी और सहज पूजा और लोकप्रिय टीवी शो ‘सुरभि’ की होस्ट की छवि उभरती है। लेकिन उनके करियर की कहानी इससे कहीं ज्यादा व्यापक है।
मनोविज्ञान की पढ़ाई से लेकर थिएटर, टेलीविजन, फिल्मों और निर्देशन तक रेणुका ने अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। सफलता मिलने के बाद भी उन्होंने सिर्फ लोकप्रियता के लिए काम करने के बजाय ऐसे किरदारों को प्राथमिकता दी, जिनमें उन्हें कुछ नया सीखने का अवसर मिले।
इसी सोच के कारण उन्होंने कई फिल्मी प्रस्ताव ठुकराए और टीवी को प्राथमिकता दी। टीवी पर उन्होंने अपनी लोकप्रिय ‘संस्कारी’ छवि से बिल्कुल अलग किरदार भी निभाए।
मनोविज्ञान की पढ़ाई के बीच थिएटर ने बदली जिंदगी
रेणुका शहाणे का जन्म 7 अक्टूबर 1966 को मुंबई में हुआ। उनका परिवार कला और साहित्य से जुड़ा रहा है। उनके पिता विजय कुमार शहाणे भारतीय नौसेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां शांता गोखले लेखिका, थिएटर से जुड़ी शख्सियत और फिल्म समीक्षक हैं।
रेणुका ने सेंट जेवियर्स कॉलेज से मनोविज्ञान की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान ‘अंधेर नगरी’ नाटक से उनका थिएटर के प्रति लगाव बढ़ा।
वह शुरुआत में अभिनेत्री बनने के बारे में नहीं सोच रही थीं। उनका उद्देश्य सिर्फ थिएटर का हिस्सा बनना था। लेकिन नाटक की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखने के बाद अभिनय के प्रति उनका रुझान बढ़ता गया।
सत्यदेव दुबे के सवाल पर बदला जवाब
रेणुका की मां के करीबी दोस्त और दिग्गज थिएटर निर्देशक सत्यदेव दुबे उनसे अक्सर पूछते थे कि क्या वह अभिनय करना चाहेंगी।
शुरुआत में रेणुका पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए मना कर देती थीं। लेकिन ‘अंधेर नगरी’ का अनुभव लेने के बाद उनका नजरिया बदल गया।
जब दुबे ने दोबारा उनसे अभिनय के बारे में पूछा तो इस बार उन्होंने हामी भर दी। इसके बाद उन्होंने वर्कशॉप्स कीं और मराठी थिएटर संस्था ‘अंतरनाट्य’ के साथ एक्सपेरिमेंटल थिएटर किया।
अभिनय के अलावा उन्होंने सेट, मेकअप, कॉस्ट्यूम और लाइटिंग जैसे थिएटर से जुड़े काम भी सीखे।
‘सर्कस’ ने अभिनय को बनाया प्रोफेशन
थिएटर के बाद रेणुका ने टीवी पर काम शुरू किया। उन्होंने ‘पीसी और मौसी’ के बाद ‘सर्कस’ में काम किया।
शाहरुख खान स्टारर ‘सर्कस’ उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। निर्देशक अजीज मिर्जा ने उन्हें अभिनय को गंभीरता से लेने की सलाह दी।
उस समय रेणुका क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमए कर चुकी थीं और पीएचडी करने के बारे में सोच रही थीं। लेकिन अजीज मिर्जा की सलाह के बाद उन्होंने अभिनय को पेशे के तौर पर अपनाने का फैसला किया।
‘सुरभि’ से घर-घर मिली पहचान
इसके बाद रेणुका शहाणे ने सिद्धार्थ काक के साथ ‘सुरभि’ में काम किया। इस कार्यक्रम ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
छोटे बाल, साड़ी और सहज अंदाज में नजर आने वाली रेणुका दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुईं। हालांकि, उन्होंने कभी अभिनय को स्टारडम हासिल करने की दौड़ के रूप में नहीं देखा।
उनके लिए काम से मिलने वाला अनुभव और अच्छी भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण रही।
‘हम आपके हैं कौन’ ने बनाया घर-घर का चेहरा
साल 1994 में ‘हम आपके हैं कौन’ रिलीज हुई। फिल्म में रेणुका ने माधुरी दीक्षित की बड़ी बहन और सलमान खान की भाभी पूजा का किरदार निभाया।
फिल्म करने से पहले उन्हें चेतावनी दी गई थी कि भाभी का किरदार निभाने के बाद इंडस्ट्री उन्हें उसी तरह के किरदारों में देख सकती है। इसके बावजूद रेणुका ने भूमिका स्वीकार की।
फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद यही बात उनके करियर में चुनौती बनकर सामने आई।
हिट फिल्म के बाद मिलने लगे एक जैसे रोल
‘हम आपके हैं कौन’ के बाद रेणुका को कई फिल्मों के प्रस्ताव मिले, लेकिन अधिकतर किरदार एक जैसे थे।
उन्हें बार-बार हीरो की बहन, भाभी या ‘अच्छी भारतीय लड़की’ जैसे रोल ऑफर किए जा रहे थे। रेणुका को लगा कि फिल्मों में उनकी पहचान एक ही तरह के किरदार तक सीमित हो रही है।
इसके उलट टीवी पर उन्हें ज्यादा मजबूत और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं मिल रही थीं। इसलिए उन्होंने फिल्मों के बजाय टेलीविजन और थिएटर को प्राथमिकता देना शुरू किया।
उनके लिए किसी फिल्म में दिखाई देना महत्वपूर्ण नहीं था। वह ऐसा किरदार चाहती थीं, जिसमें अभिनेत्री के तौर पर कुछ नया करने का मौका मिले।
एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर वाली महिला का रोल निभाया
टीवी पर रेणुका ने अपनी ‘संस्कारी’ छवि से बिल्कुल अलग किरदार निभाया।
‘सैलाब’ में उन्होंने एक ऐसी महिला की भूमिका निभाई, जिसका एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर था। यह किरदार दर्शकों के लिए काफी चौंकाने वाला था।
रेणुका ने बताया था कि कई दर्शकों ने उनसे कहा कि उन्हें उनसे ऐसी भूमिका की उम्मीद नहीं थी।
इस किरदार ने यह साबित किया कि ‘हम आपके हैं कौन’ की पूजा वाली छवि के पीछे एक ऐसी अभिनेत्री भी है, जो अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाने की क्षमता रखती है।
करियर के शुरुआती दौर में कास्टिंग काउच का अनुभव
रेणुका शहाणे ने 2025 में एक इंटरव्यू के दौरान अपने करियर के शुरुआती दौर के एक कड़वे अनुभव के बारे में बात की थी।
उनके मुताबिक, एक शादीशुदा निर्माता उनके घर आया था। उसने उन्हें एक साड़ी कंपनी का ब्रांड एंबेसडर बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन इसके साथ एक अनुचित निजी प्रस्ताव भी रखा।
निर्माता ने कथित तौर पर उनके साथ रहने के बदले हर महीने स्टाइपेंड देने की बात कही थी।
रेणुका और उनकी मां इस प्रस्ताव से हैरान रह गईं। उन्होंने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया।
गलत प्रस्ताव को ठुकराने का जोखिम भी जानती थीं
रेणुका के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री में किसी प्रभावशाली व्यक्ति के अनुचित प्रस्ताव को ठुकराने के बाद करियर पर असर पड़ने का खतरा रहता है।
काम से निकालना या आगे अवसर नहीं मिलना जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसके बावजूद रेणुका ने अपने करियर से समझौता करने के बजाय अपनी सीमाओं को प्राथमिकता दी।
उनकी पूरी करियर यात्रा में यह बात दिखाई देती है कि उन्होंने लोकप्रियता या लगातार काम मिलने के बजाय अपने लिए सही भूमिका को महत्व दिया।
पहली शादी टूटी, फिर आशुतोष राणा से मिला साथ
रेणुका शहाणे की निजी जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव रहे। उनकी पहली शादी मराठी थिएटर लेखक और निर्देशक विजय केंकरे से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और दोनों का तलाक हो गया।
इसके बाद उनकी जिंदगी में अभिनेता आशुतोष राणा आए। दोनों ने करीब तीन साल डेट करने के बाद 25 मई 2001 को शादी की।
दोनों के दो बेटे हैं। लंबे वैवाहिक जीवन के बावजूद रेणुका और आशुतोष ने पर्दे पर साथ में बहुत कम काम किया है।
अभिनय के बाद निर्देशन की दुनिया में कदम
रेणुका ने अभिनय के साथ निर्देशन में भी कदम रखा।
उन्होंने मराठी फिल्म ‘रीटा’ का निर्देशन किया, जो उनकी मां शांता गोखले के उपन्यास ‘रीटा वेलिंगकर’ पर आधारित थी।
इसके बाद 2021 में उन्होंने हिंदी फिल्म ‘त्रिभंगा’ का निर्देशन किया। फिल्म में काजोल, तन्वी आजमी और मिथिला पालकर प्रमुख भूमिकाओं में थीं।
फिल्म में मां-बेटी के रिश्ते, परिवार, महत्वाकांक्षा और अलगाव जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया।
हाल ही में रेणुका ने ‘तर्पण’ नाम की शॉर्ट फिल्म भी बनाई, जिसमें उन्होंने अपने पति आशुतोष राणा को निर्देशित किया।
सफलता को कभी लक्ष्य नहीं बनाया
रेणुका शहाणे की करियर सोच बाकी कलाकारों से अलग रही। उन्होंने कभी किसी खास मुकाम तक पहुंचने को अपनी महत्वाकांक्षा नहीं बनाया।
उनका मानना रहा कि अगर अच्छा काम मिल रहा है और उससे कुछ नया सीखने का मौका मिलता है तो वही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने कभी आईने के सामने खड़े होकर अवॉर्ड हाथ में लेकर भाषण देने की प्रैक्टिस नहीं की।
थिएटर उनके लिए शुरुआत में शौक था, लेकिन धीरे-धीरे वही उनका पैशन और फिर प्रोफेशन बन गया।
संघर्ष को लेकर भी अलग नजरिया
रेणुका अपनी कहानी को बहुत बड़े संघर्ष की कहानी नहीं मानतीं। उनका कहना है कि मुंबई में जन्म और परिवार के मजबूत सपोर्ट के कारण उन्हें आर्थिक असुरक्षा का सामना नहीं करना पड़ा।
जब किसी ऑडिशन में काम नहीं मिलता था, तब भी उनके पास घर और परिवार का सहारा था।
इसी वजह से वह अपने मन के मुताबिक काम चुन सकीं और ऐसे प्रस्तावों को मना कर सकीं, जिन्हें वह अपने लिए सही नहीं मानती थीं।
रेणुका शहाणे की सबसे बड़ी जीत
रेणुका शहाणे की कहानी सिर्फ ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘सुरभि’ की लोकप्रियता तक सीमित नहीं है।
उनकी असली पहचान उन फैसलों से बनी, जो उन्होंने सफलता के बाद लिए। एक जैसे फिल्मी किरदार मिलने पर उन्होंने टीवी और थिएटर चुना, चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं स्वीकार कीं, अनुचित प्रस्ताव को ठुकराया और बाद में निर्देशन में भी अपनी पहचान बनाई।
उनका करियर यह दिखाता है कि लोकप्रियता से ज्यादा महत्वपूर्ण अपने काम और फैसलों पर कायम रहना हो सकता है।
रेणुका के शब्दों में, उन्हें जिंदगी में बहुत कुछ मिला है। यही संतुष्टि शायद उनके लंबे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
