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प्राइमरी स्कूलों के 3 हजार बच्चों का होगा डिजिटल टेस्ट : सरकारी-स्कूलों के बच्चों के गणित-भाषा की समझ परखी जाएगी

रायपुर। प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई का स्तर अब डिजिटल टेस्ट से परखा जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। आकलन के लिए प्रदेश के 300 से ज्यादा प्राथमिक स्कूलों का रेंडम चयन किया जाएगा। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 3 हजार विद्यार्थियों को भी रेंडम तरीके से मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।
इस आकलन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बच्चे अपनी कक्षा के अनुसार गणित और भाषा की बुनियादी दक्षताएं कितनी हासिल कर पाए हैं। इसमें केवल किताबों में पढ़ी चीजों को याद करने पर जोर नहीं होगा, बल्कि बच्चों की वास्तविक समझ और उनका कौशल देखा जाएगा।

भाषा में पढ़ने और समझने की क्षमता देखी जाएगी

आकलन में बच्चों की भाषा संबंधी बुनियादी क्षमता की जांच की जाएगी। इसमें यह देखा जा सकेगा कि बच्चे किसी लिखी हुई सामग्री को कितनी अच्छी तरह पढ़ और समझ पा रहे हैं। साथ ही अपनी बात को समझाकर बताने और भाषा का सही इस्तेमाल करने जैसी क्षमताओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों का भाषा सीखने का स्तर कक्षा के हिसाब से अपेक्षित है या नहीं।

गणित में संख्या ज्ञान से लेकर जोड़-घटाव तक

गणित में बच्चों की बुनियादी समझ को परखा जाएगा। इसमें संख्या ज्ञान, गणना, जोड़-घटाव, गुणा-भाग और कक्षा स्तर की दूसरी मूलभूत अवधारणाओं से जुड़े सवाल शामिल किए जा सकते हैं।
यानी बच्चे सिर्फ फार्मूला या सवाल का जवाब याद करके बता रहे हैं या वास्तव में गणित की अवधारणा को समझते हैं, इसका आकलन किया जाएगा।

300 से ज्यादा स्कूलों से रेंडम चयन होगा

एससीईआरटी ने मूल्यांकन के लिए प्रदेश के 300 से ज्यादा प्राथमिक स्कूलों के चयन की प्रक्रिया शुरू की है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 3 हजार विद्यार्थियों का रेंडम चयन किया जाएगा।
रेंडम चयन का मकसद किसी एक स्कूल या क्षेत्र के आधार पर बच्चों के सीखने के स्तर का अनुमान लगाने के बजाय प्रदेश के प्राथमिक विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति को समझना है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों और स्कूलों के बच्चों के प्रदर्शन का भी विश्लेषण किया जा सकेगा।

डिजिटल तरीके से सीधे तैयार होगा डेटा
इस आकलन की खास बात इसका डिजिटल होना है। सामान्य ऑफलाइन परीक्षा में प्रश्नपत्र बांटने, उत्तर पुस्तिका जमा करने, मैनुअल जांच और फिर डेटा तैयार करने में समय लगता है। डिजिटल प्रक्रिया में विद्यार्थियों के प्रदर्शन का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज किया जा सकेगा।
इससे परिणाम तैयार करने और अलग-अलग स्कूलों या क्षेत्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण करने में भी आसानी होगी।

कमजोर दक्षता वाले बच्चों के लिए बदली जा सकती है रणनीति
यह आकलन सिर्फ बच्चों की परीक्षा लेने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे मिलने वाले परिणामों का इस्तेमाल आगे की शैक्षणिक योजना बनाने में किया जा सकता है।
अगर किसी स्तर पर बच्चों की भाषा या गणित की बुनियादी दक्षता कमजोर मिलती है, तो उस कौशल को मजबूत करने के लिए पढ़ाने के तरीके और शैक्षणिक गतिविधियों में बदलाव किया जा सकेगा।

किताब के ज्ञान से ज्यादा समझ पर रहेगा फोकस
प्राथमिक कक्षाओं में भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताएं आगे की पढ़ाई की नींव होती हैं। इसलिए शुरुआत में ही यह पता लगाना जरूरी है कि बच्चे अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार सीख पा रहे हैं या नहीं।
इसी वजह से प्रस्तावित डिजिटल आकलन में किताबी ज्ञान के बजाय बच्चों की बुनियादी समझ, पढ़ने-समझने की क्षमता और गणितीय कौशल पर ज्यादा फोकस रहेगा।

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