अपराध और हादसा

अमन साहू की मौत के 1.5 साल बाद रायपुर केस में बड़ा फैसला, डकैती की साजिश और रंगदारी के मामले में 7 आरोपी बरी

रायपुर। संवाददाता: झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू की मौत के करीब डेढ़ साल बाद रायपुर के एक आपराधिक मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। गंज थाना में दर्ज डकैती की साजिश और रंगदारी के मामले में थर्ड एडीजे कोर्ट ने अमन साहू समेत सभी 7 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

कोर्ट का फैसला 18 अगस्त 2026 को आया। कोर्ट रिकॉर्ड में मामले के परिणाम के तौर पर ‘कॉन्टेस्टेड-एक्विटेड’ दर्ज किया गया है।

अभियोजन पक्ष ट्रायल के दौरान डकैती की साजिश, रंगदारी और हथियारों से जुड़े आरोपों को साबित नहीं कर सका।

अमन साहू समेत 7 आरोपी बरी

इस मामले में अमन साहू के अलावा कुल छह अन्य आरोपी भी थे। कोर्ट ने सभी सातों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

मामले में आरोपी बनाए गए लोगों के नाम:

  • अमन साहू
  • रोहित स्वर्णकार
  • मुकेश कुमार
  • देवेंद्र सिंह
  • राजबेर सिंह
  • पप्पू सिंह
  • सुनील कुमार उर्फ मयंक सिंह

कोर्ट ने ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से पेश किए गए सबूतों के आधार पर सभी आरोपियों को बरी किया।

डकैती की साजिश और रंगदारी का था मामला

मामला गंज थाना में दर्ज किया गया था। इसमें आरोपियों पर डकैती की साजिश, रंगदारी और हथियारों से जुड़े आरोप लगाए गए थे।

बचाव पक्ष के वकील के मुताबिक, पुलिस की ओर से साजिश और हथियारों से जुड़े जो सबूत पेश किए गए, वे आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को अदालत के सामने साबित नहीं कर सका, जिसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

एनकाउंटर में हो चुकी है अमन साहू की मौत

अमन साहू की मार्च 2025 में झारखंड पुलिस के साथ मुठभेड़ में मौत हो गई थी।

इसके करीब डेढ़ साल बाद रायपुर के इस मामले में कोर्ट का फैसला आया है। हालांकि, अमन साहू की मौत के बावजूद उसके खिलाफ लंबित मामले की न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर आगे बढ़ी और अब इस केस में उसे दोषमुक्त कर दिया गया है।

कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार

18 अगस्त को फैसला आने के बावजूद कोर्ट के विस्तृत आदेश की कॉपी अभी अपलोड नहीं हुई है।

इस वजह से यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत ने किन विशिष्ट कानूनी और साक्ष्य संबंधी आधारों पर अभियोजन के आरोपों को अस्वीकार किया।

विस्तृत आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में पुलिस द्वारा पेश किए गए किन सबूतों को अदालत ने पर्याप्त नहीं माना।

अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका

मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि अभियोजन पक्ष ट्रायल के दौरान डकैती की साजिश, रंगदारी और हथियारों से जुड़े आरोपों को साबित नहीं कर सका।

बचाव पक्ष ने भी अदालत में पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों की पर्याप्तता पर सवाल उठाए थे।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर बरी किए जाने का विस्तृत कानूनी आधार कोर्ट की आदेश कॉपी आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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