झारखंड के वैद्यनाथ धाम में जल चढ़ाने के लिए दुर्ग से निकली कांवड़ यात्रा के दौरान 31 वर्षीय मणी चंद्राकर की मौत हो गई। सुल्तानगंज से देवघर पैदल जाते समय मनिया मोड़ के पास उनके सीने में अचानक तेज दर्द हुआ। अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की आशंका जताई जा रही है।
दुर्ग। सावन माह में झारखंड के वैद्यनाथ धाम में गंगाजल चढ़ाने के लिए दुर्ग से बाबा धाम यात्रा पर निकले गया नगर वार्ड क्रमांक 4 निवासी 31 वर्षीय मणी चंद्राकर की रास्ते में अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।
35 कांवड़ियों की टोली के साथ निकले थे
जानकारी के अनुसार मणी चंद्राकर रविवार को करीब 35 कांवड़ियों की टोली के साथ दुर्ग से बाबा धाम के लिए रवाना हुए थे। यह यात्रा गोंडपारा निवासी अमित पटेल के नेतृत्व में निकाली गई थी।
टोली ने एक हजार किलोमीटर से अधिक का सफर तय करने के बाद बिहार के सुल्तानगंज पहुंचकर गंगा स्नान किया। इसके बाद सभी कांवड़िए 10 अगस्त की शाम गंगाजल लेकर पैदल देवघर के लिए रवाना हुए।
मनिया मोड़ के पास अचानक बिगड़ी तबीयत
11 अगस्त को सुल्तानगंज से करीब 27 किलोमीटर दूर मनिया मोड़ के पास पैदल यात्रा के दौरान मणी चंद्राकर के सीने में अचानक तेज दर्द उठा। तबीयत बिगड़ने पर उनके साथी कांवड़ियों ने उन्हें रास्ते में स्थित एक कैंप में रुकवाया। इसके बाद तत्काल उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
अस्पताल में उपचार के दौरान मौत
स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों की सलाह पर मणी चंद्राकर को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। वहां उपचार के दौरान उनकी सांसें थम गईं।प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की आशंका जताई जा रही है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में मौत के कारण की अंतिम चिकित्सकीय पुष्टि का उल्लेख नहीं है।
परिवार और मोहल्ले में पसरा मातम
बाबा धाम यात्रा के दौरान मणी चंद्राकर की मौत की खबर दुर्ग पहुंचते ही उनके परिवार और परिचितों में शोक छा गया। गया नगर इलाके में भी मातम का माहौल है। मृतक के साथ यात्रा कर रहे कांवड़ियों ने यात्रा स्थगित कर दी है और शव को दुर्ग वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
