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छत्तीसगढ़ में खेलों को मिलेगा नया आयाम, मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए ₹100 करोड़; हॉकी लीग की तैयारी शुरू

उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने बताया कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत 100 करोड़ रुपये तथा छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य में पहली बार हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी भी शुरू हो गई है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य खेल अधोसंरचना को मजबूत करना, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना तथा प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और उप संचालक रश्मि ठाकुर भी उपस्थित थीं।

अरुण साव ने बताया कि प्रदेश में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही राज्य की खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए 14 प्रशिक्षकों को पटियाला प्रशिक्षण हेतु भेजा गया है।

उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के विस्तार के लिए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती जैसे छह नए जिलों में खेल अधिकारी के पद सृजित किए गए हैं। विभाग में 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डनों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक बच्चे और युवा खेल के मैदानों से जुड़ें। उन्होंने बताया कि राज्य गठन के समय खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट केवल 4 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 304 करोड़ रुपये हो गया है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष से सरगुजा ओलंपिक की भी शुरुआत की गई है। इसके अलावा देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सफल मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।

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