छत्तीसगढ़ में प्रभावित किसानों को राहत: 2,391 किसानों को मिला 5.81 करोड़ रुपये का खरीफ ऋण

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अंबिकापुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की वित्तीय अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को राहत देते हुए खरीफ ऋण वितरण शुरू कर दिया है। अब तक 2,391 किसानों को 5.81 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की वित्तीय अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को राहत देते हुए खरीफ ऋण वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार की पहल से किसानों को खरीफ सीजन के लिए आवश्यक कृषि ऋण एवं कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के विशेष प्रयासों से यह प्रक्रिया शुरू हो सकी है।
4,533 किसानों के लिए लगभग 111 करोड़ रुपये की ऋण सीमा स्वीकृत
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर के अनुसार बलरामपुर जिले की चार प्रभावित समितियों के 4,533 किसानों के लिए 11098.269 लाख रुपये (लगभग 111 करोड़ रुपये) की ऋण सीमा (NCL) स्वीकृत की गई है।
क्षेत्रवार स्वीकृत ऋण सीमा इस प्रकार है—
- शंकरगढ़: 1,542 किसान
- रामानुजगंज: 1,502 किसान
- रामचंद्रपुर: 1,320 किसान
- कुसमी: 169 किसान
अब तक 2,391 किसानों को मिला 5.81 करोड़ रुपये का खरीफ ऋण
सरकार द्वारा खरीफ ऋण वितरण भी तेज गति से किया जा रहा है। अब तक 2,391 किसानों को 5 करोड़ 81 लाख 65 हजार रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है।
क्षेत्रवार वितरण इस प्रकार है—
- रामानुजगंज: 1,575 किसानों को 4.83 करोड़ रुपये
- शंकरगढ़: 659 किसानों को 78.02 लाख रुपये
- कुसमी: 157 किसानों को 19.61 लाख रुपये
वित्तीय अनियमितताओं के बाद सरकार की कार्रवाई
वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान हुई वित्तीय अनियमितताओं के कारण प्रभावित किसानों को समय पर ऋण, खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। राज्य सरकार ने मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की है तथा मामले की जांच जारी है।
किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता: कृषि मंत्री
कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में समय पर ऋण उपलब्ध कराने से बुवाई कार्य को गति मिलेगी और किसानों को कृषि कार्यों के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।




