अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की अदालत ने Meta पर 567 मिलियन डॉलर (करीब 4,700 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। अदालत ने Facebook और Instagram पर किशोरों की सुरक्षा बढ़ाने, स्क्रीन टाइम सीमित करने और सुरक्षा फीचर्स मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया कंपनी Meta को अमेरिका में बड़ा कानूनी झटका लगा है। Meta 567 million dollar fine New Mexico Court 2026 मामले में न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने कंपनी पर 567 मिलियन डॉलर (करीब 4,700 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। साथ ही Facebook और Instagram के संचालन में कई अहम बदलाव लागू करने का आदेश भी दिया गया है।
सांता फे के न्यायाधीश ब्रायन बीडशीड ने न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज़ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि Meta के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत की पर्याप्त सुरक्षा करने में विफल रहे हैं। अदालत ने इसे राज्य में ‘पब्लिक न्यूसेंस’ (जन-उत्पात) की श्रेणी में माना।
किशोरों की सुरक्षा के लिए लागू होंगे नए नियम
अदालत ने अगले पांच वर्षों के लिए Meta को कई सख्त सुरक्षा उपाय लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत:
- किशोरों के लिए Facebook और Instagram के उपयोग की मासिक समय सीमा तय करनी होगी।
- अनावश्यक नोटिफिकेशन सीमित करने होंगे।
- वयस्कों और नाबालिगों के बीच संपर्क पर कड़ी निगरानी रखनी होगी।
- AI चैटबॉट्स के लिए अतिरिक्त सुरक्षा तंत्र विकसित करना होगा।
- बाल यौन शोषण से जुड़ी शिकायतों की निगरानी और समीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करना होगा।
पहले भी दोषी ठहराया जा चुका है Meta
इस मामले के पहले चरण में मार्च 2026 में जूरी ने Meta को न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया था। उस समय कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर का हर्जाना लगाया गया था।
इसके बाद तीन सप्ताह तक चली दूसरे चरण की सुनवाई के बाद अदालत ने अब कुल 567 मिलियन डॉलर का डिक्री आदेश जारी किया है।
Meta ने फैसले को दी चुनौती
Meta ने अदालत के फैसले से असहमति जताते हुए अपील करने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि वह ऑनलाइन किशोरों की सुरक्षा के लिए किए गए अपने प्रयासों को लेकर आश्वस्त है और अदालत के फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका में टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। कई अन्य राज्यों और स्कूल जिलों में भी सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ इसी तरह के मुकदमे चल रहे हैं।
