बिलासपुर। महादेव बुक ऑनलाइन सट्टा मामले से जुड़े बैंक खातों को अनफ्रीज करने की मांग को जिला कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई दसवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत में हुई।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भले ही कोई व्यक्ति एफआईआर या चार्जशीट में सीधे तौर पर आरोपी न हो, लेकिन यदि उसके बैंक खाते का उपयोग अपराध की कमाई या संदिग्ध लेन-देन के लिए हुआ है, तो जांच पूरी होने तक खाते को अनफ्रीज नहीं किया जा सकता। अदालत ने जेएमएफसी कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका निरस्त कर दी।
मामला तारबहार थाना में दर्ज धोखाधड़ी और साजिश से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी रजत जैन ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक के कर्मचारियों जय दुबे, सार्थक गसवाड़े और गौरव चौधरी की मदद से कई लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए। खाताधारकों से हस्ताक्षर और ओटीपी लेकर इन खातों का इस्तेमाल फर्जी कंपनियों के जरिए 50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन में किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने याचिकाकर्ता विकास कुमार सिंह के आईसीआईसीआई बैंक खाते में जमा 90 हजार 751 रुपये की राशि को डेबिट-फ्रीज कर दिया था। खाते को दोबारा चालू कराने के लिए दायर आवेदन को पहले जेएमएफसी कोर्ट ने खारिज किया था, जिसके बाद सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह मामले में आरोपी नहीं है और खाते से जुड़े दस्तावेज पुलिस जब्त कर चुकी है, इसलिए खाता फ्रीज रखना अनुचित है। वहीं शासकीय पक्ष ने जांच पूरी होने तक खाते को फ्रीज रखने की मांग की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
