छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में आईटीबीपी और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर जाटलूर नाला पर 250 फीट लंबा अस्थायी फुट सस्पेंशन पुल तैयार किया है। पुल बनने से कई गांवों का संपर्क बहाल हुआ है और बरसात में आवागमन आसान हो गया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के दुर्गम जाटलूर क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर विकास और विश्वास की नई मिसाल पेश की है। जाटलूर नाला पर श्रमदान के माध्यम से 250 फीट लंबा अस्थायी लकड़ी का फुट सस्पेंशन पुल तैयार किया गया है, जिससे बरसात के दौरान आवागमन की वर्षों पुरानी समस्या दूर होगी।
आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी द्वारा निर्मित इस पुल का लोकार्पण केंद्रीय सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह ने किया। पुल को पिछले वर्ष नवंबर में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए जवान अमोल माधव राव महस्के की स्मृति में समर्पित किया जाएगा।
श्रमदान से तैयार हुआ विकास का नया सेतु
करीब 250 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊंचा यह पुल सुरक्षा बलों और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त श्रमदान से तैयार किया गया है। निर्माण में स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया गया, जिससे कम समय में पुल तैयार हो सका।
इस पुल के निर्माण से बरसात के दौरान उफनते जाटलूर नाला को पार करने का जोखिम काफी कम हो जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों, ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के लिए वर्षभर सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन संभव होगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
लोकार्पण समारोह में महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह के साथ आईटीबीपी की 45वीं, 29वीं, 38वीं और 53वीं वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, शिक्षक और स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया।
सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत मिली सहायता
कार्यक्रम के अवसर पर आईटीबीपी ने सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत जरूरतमंद ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं को साइकिलों का वितरण किया। इसके अलावा स्वरोजगार, कौशल विकास और केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
शहीद के सम्मान में रखा जाएगा पुल का नाम
महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह ने पुल निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जवानों और अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने घोषणा की कि इस पुल का नाम शहीद अमोल माधव राव महस्के के नाम पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पुल शहीद के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की भावना का स्थायी प्रतीक बनेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
स्थानीय ग्रामीणों ने आईटीबीपी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पुल केवल दो किनारों को नहीं जोड़ता, बल्कि सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच विश्वास को भी और मजबूत करता है।
