असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और मृतकों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। 13 जिलों में 1.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ को केवल राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के बजाय इसके लिए वैज्ञानिक और स्थायी समाधान तलाशने पर जोर दिया है।
गुवाहाटी। असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी अभी भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है, जबकि 13 जिलों में 1.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। जिला प्रशासन प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार लोगों को राहत एवं पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्थायी समाधान पर दिया जोर
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में हर वर्ष सामने आने वाली बाढ़ की समस्या के लिए केवल इसे राष्ट्रीय आपदा का दर्जा देने की मांग करने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत बताई है। उन्होंने सरकार और सिविल सोसाइटी के संयुक्त प्रयासों से ऐसे टिकाऊ समाधान विकसित करने पर जोर दिया, जिन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
शिवसागर में राहत और पुनर्वास की समीक्षा
इस बीच असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने 7 अगस्त को शिवसागर जिले में बाढ़ के बाद चल रहे राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में प्रभावित परिवारों को दी जा रही आर्थिक सहायता, नुकसान के आकलन, जल निकासी और बाढ़ का पानी हटाने की कार्रवाई की प्रगति पर चर्चा हुई।
जिला प्रशासन के अनुसार, शिवसागर जिले के लगभग 43 हजार बाढ़ प्रभावित परिवारों को 15 हजार रुपये की अंतरिम आर्थिक सहायता मिल चुकी है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पात्र परिवारों तक सहायता बिना देरी पहुंचे और कोई भी योग्य लाभार्थी योजना से वंचित न रहे।
पुनर्वास कार्य में तेजी के निर्देश
प्रशासन को बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में तेजी लाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिन परिवारों के घर पूरी तरह बाढ़ में बह गए हैं, उनके लिए अस्थायी आश्रय की व्यवस्था के लिए भी संसाधन जुटाए जा रहे हैं।
मंत्री पीयूष हजारिका पिछले कई दिनों से शिवसागर और चराइदेव जिलों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों से बातचीत कर रहे हैं और राहत कार्यों की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
गोलाघाट में भी गंभीर हालात
गोलाघाट जिले के कई इलाकों में भी बाढ़ का पानी बना हुआ है। धनसिरी और दोयांग नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में जाना पड़ा।
भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने भी गोलाघाट में बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की और स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं और राहत सामग्री मिलने के बावजूद उनके सामने दोबारा घर बसाने की बड़ी चुनौती है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें घर उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने की अपील की।
राहत और बचाव अभियान जारी
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावित आबादी तक आर्थिक सहायता और आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का आकलन भी किया जा रहा है।
असम में लगातार सामने आने वाली बाढ़ की समस्या के बीच मुख्यमंत्री का स्थायी समाधान पर जोर अब इस आपदा से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत को रेखांकित करता है।
