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मुंबई में छिपा था पूर्व नक्सली, जशपुर पुलिस ने दबोचा; इंसास रायफल के दम पर करता था अवैध वसूली

जशपुर पुलिस ने हथियारों के बल पर अवैध वसूली करने के आरोपी पलटू दास को मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर जंगल में राहगीरों और ग्रामीणों को हथियार दिखाकर डराने-धमकाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में पूर्व में नक्सली संगठन से जुड़े होने और वर्ष 2012 में जंगल में छिपे हथियार मिलने की बात कही है।

जशपुर। छत्तीसगढ़ की जशपुर पुलिस ने हथियारों के दम पर लोगों में दहशत फैलाकर कथित तौर पर अवैध वसूली करने वाले एक आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी पलटू दास पूर्व में नक्सली संगठन से जुड़ा रहा है। वह करीब दो महीने से पुलिस को चकमा देकर अलग-अलग ठिकानों पर छिप रहा था।

पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, साइबर इनपुट और मुखबिरों की सूचना के आधार पर आरोपी का मुंबई में ठिकाना पता लगाया और विशेष टीम भेजकर उसे गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है।

जंगल में छोड़ गए थे इंसास रायफल समेत हथियार

मामला 11 जून 2026 का है। जशपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के जंगलों में दो सशस्त्र बदमाशों द्वारा राहगीरों को डरा-धमकाकर अवैध वसूली किए जाने की सूचना पुलिस को मिली थी।

सूचना पर पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। पुलिस को आता देख दोनों आरोपी जंगल की ओर भाग निकले और मौके पर इंसास रायफल, देशी कट्टा, होममेड रायफल, कारतूस, तलवार, कैंची और बैग छोड़ गए।

जांच में आरोपियों की पहचान झारखंड निवासी हृदय साहू और पलटू दास के रूप में हुई।

एक आरोपी पहले ही गिरफ्तार

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हृदय साहू को उसके गांव से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं मुख्य आरोपी बताए जा रहे पलटू दास की लगातार तलाश की जा रही थी।

आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। आखिरकार तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को उसके मुंबई में छिपे होने की जानकारी मिली।

हथियारों के दम पर वसूली का आरोप

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में पलटू दास ने अपने साथी हृदय साहू के साथ मिलकर सीमावर्ती इलाकों में हथियारों के दम पर दहशत फैलाकर पैसे वसूलने की योजना बनाने की बात स्वीकार की है।

आरोप है कि दोनों ने राहगीरों से पैसे ऐंठने के अलावा जंगल में मशरूम बीनने आई युवतियों और खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों को भी हथियारों का डर दिखाया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कुछ ग्रामीणों से उनका भोजन तक छीनकर खाया।

2012 में हथियार मिलने का दावा

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने यह भी दावा किया है कि वह पहले नक्सली संगठन का सक्रिय सदस्य रह चुका है और वर्ष 2012 में जंगल में छिपाकर रखे गए हथियार उसे मिले थे।

हालांकि, इन दावों और हथियारों के स्रोत को लेकर पुलिस की जांच जारी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद हथियारों का वास्तविक स्रोत क्या है और इस पूरे मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या रही है।

आपराधिक नेटवर्क की जांच जारी

जशपुर एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के मार्गदर्शन में पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां आरोपी के आपराधिक नेटवर्क, अवैध हथियारों के स्रोत और उसके सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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