छत्तीसगढ़देश दुनियां

नक्सल पीड़ित 78 वर्षीय वंजाम चिंगे को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का सहारा, घर पहुंचकर बना वय वंदन कार्ड

सुकमा जिले के दूरस्थ नक्सल प्रभावित ग्राम पुनपल्ली में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 78 वर्षीय वंजाम चिंगे के घर पहुंचकर दस्तावेजों का सत्यापन किया और उनका वय वंदन कार्ड बनाया। अब उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिल सकेगा। शिविर में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच भी की गई।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की पहल के तहत एक संवेदनशील उदाहरण सामने आया है। आयुष्मान भारत संतृप्ति अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्राम पुनपल्ली (दुब्बाटोटा), विकासखंड कोंटा में 78 वर्षीय नक्सल पीड़ित बुजुर्ग महिला श्रीमती वंजाम चिंगे के घर पहुंची और उनका वय वंदन कार्ड बनाया।

कार्ड बनने के बाद अब वंजाम चिंगे को आयुष्मान भारत योजना के तहत शासकीय और चिन्हित अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

घर पहुंचकर किया दस्तावेजों का सत्यापन

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुजुर्ग महिला के घर पहुंचकर आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया। इसके बाद मौके पर ही उनका वय वंदन कार्ड तैयार किया गया।

दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाली बुजुर्ग महिला के लिए शासन की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ घर तक पहुंचना बड़ी राहत माना जा रहा है।

नक्सल हिंसा में पति की हुई थी हत्या

श्रीमती वंजाम चिंगे का जीवन लंबे संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2006 में नक्सल हिंसा के दौरान उनके पति स्वर्गीय वंजाम देवे की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन आगे बढ़ाया।

ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम का उनके घर पहुंचकर स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके लिए राहत और सम्मान का अवसर बना।

शिविर में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच

आयुष्मान भारत संतृप्ति अभियान के तहत आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। इसके साथ ही ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच भी की गई।

जांच के दौरान चार मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए, जिनका तत्काल उपचार शुरू किया गया। वहीं, तीन मरीजों को बेहतर उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोरनापाल रेफर किया गया।

अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाने का प्रयास

आयुष्मान भारत संतृप्ति अभियान का उद्देश्य दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ पहुंचाना है।

अभियान केवल आयुष्मान कार्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पात्र लोगों को स्वास्थ्य जांच, समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

वंजाम चिंगे का उदाहरण बताता है कि जब शासन की योजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पहुंचती हैं, तो उनका लाभ केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों में सुरक्षा, सम्मान और शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button