रायपुर। मिल्क पावडर और पाम ऑयल से तैयार होने वाले एनालॉग दुग्ध उत्पादों पर राज्य सरकार की सख्ती शुरू हो गई है। प्रतिबंध लागू होने से पहले ही अधिकांश फैक्ट्रियों ने एनालॉग पनीर का उत्पादन बंद कर दिया था।
अब शासन ने ऐसे तरीके से तैयार होने वाले पनीर, मक्खन और दही के निर्माण एवं बिक्री पर भी रोक लगा दी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीम ने आदेश के पालन की जांच के लिए विभिन्न इकाइयों का निरीक्षण शुरू कर दिया है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित उत्पादों का निर्माण, संग्रहण या बिक्री करते पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर प्रतिबंध की अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है।
रायपुर की चार फैक्ट्रियों का निरीक्षण
एफडीए की टीम ने शनिवार को रायपुर जिले के भाठागांव स्थित मेसर्स केएलपी, निमोरा की एसजे डेयरी प्रोडक्ट्स, बीरगांव स्थित मेसर्स कांशी एग्रो तथा श्री सांवरिया सेठ मिल्क प्रोडक्ट्स का निरीक्षण किया। जांच के दौरान किसी भी इकाई में प्रतिबंधित एनालॉग उत्पादों का निर्माण, भंडारण या बिक्री नहीं मिली। अधिकारियों ने सभी संचालकों को शासन के निर्देशों का पूर्ण पालन करने तथा लाइसेंस में आवश्यक संशोधन कराने के निर्देश दिए।
असली पनीर के दाम बढ़ने की आशंका
कारोबारी सूत्रों का कहना है कि एनालॉग पनीर का उत्पादन बंद होने के बाद बाजार में असली पनीर की मांग बढ़ सकती है। इसके चलते आने वाले दिनों में पनीर सहित अन्य दुग्ध उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
जमाखोरी पर भी रहेगी नजर
प्रतिबंध की जानकारी पहले से मिलने के कारण एनालॉग पनीर की जमाखोरी की आशंका भी जताई जा रही है। खाद्य विभाग ऐसे होटल, रेस्टोरेंट और बड़े उपभोक्ताओं पर भी निगरानी रखेगा, जहां बड़ी मात्रा में पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की खपत होती है। आवश्यकता पड़ने पर इन संस्थानों में भी विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।
उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल ने कहा कि प्रतिबंधित उत्पादों का निर्माण या बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
