रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.) द्वारा प्रायोजित 21-दिवसीय शीतकालीन विद्यालय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज आई.सी.ए.आर. राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एन.आई.बी.एस.एम.), रायपुर में हुआ। यह कार्यक्रम “फसलों में राष्ट्रीय महत्व के कीट एवं रोगजनकों के प्रबंधन हेतु उभरती जैव प्रौद्योगिकीय एवं बायोरेशनल हस्तक्षेप” विषय पर आधारित है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के माननीय कुलपति डॉ. सचिदानंद शुक्ला ने शीतकालीन विद्यालय जैसे क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलती कृषि पारिस्थितिकी में जैव प्रौद्योगिकी एवं बायोरेशनल तकनीकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एन.आई.बी.एस.एम. के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने की। उन्होंने एकीकृत कीट प्रबंधन को अपनाने, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने तथा जैव-नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कोर्स डायरेक्टर एवं संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसमें विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यावहारिक प्रशिक्षण, संवादात्मक सत्र एवं क्षेत्र भ्रमण शामिल हैं। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. श्रीधर जे. एवं डॉ. एस. के. शर्मा हैं। इस प्रशिक्षण में देश के 11 राज्यों से 25 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम 27 जनवरी से 16 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
