जशपुर जिले में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में कुनकुरी स्थित विशेष न्यायालय ने आरोपी सन्नु चौहान उर्फ सोनू चौहान को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला जून 2025 का है, जब 14 वर्षीय पीड़िता को आरोपी बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस ने 1 जुलाई 2025 को पीड़िता को सकुशल बरामद किया था।
जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में कुनकुरी स्थित विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एवं पॉक्सो) ने आरोपी सन्नु चौहान उर्फ सोनू चौहान को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश भानु प्रताप सिंह की अदालत ने आरोपी पर 2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत के निर्देश के अनुसार आरोपी को सुनाई गई सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
रथ मेला देखने गई थी 14 वर्षीय पीड़िता
घटना जून 2025 की बताई गई है। 14 वर्षीय पीड़िता अपनी छोटी बहन के साथ स्थानीय रथ मेला देखने गई थी। शाम होने के बाद जब छोटी बहन घर लौट आई और बड़ी बेटी घर नहीं पहुंची, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान छोटी बहन ने बताया कि आरोपी सोनू चौहान उसे डराने-धमकाने और शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया है। परिजनों ने मामले की शिकायत पुलिस से की।
पुलिस ने 1 जुलाई को पीड़िता को सकुशल बरामद किया
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने 1 जुलाई 2025 को पीड़िता को आरोपी के कब्जे से सकुशल बरामद कर लिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए और संबंधित गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दाखिल हुई चार्जशीट
मामले की जांच में महिला पुलिस अधिकारी के समक्ष दर्ज किए गए बयानों के साथ वैज्ञानिक एवं फोरेंसिक साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में पुख्ता चार्जशीट प्रस्तुत की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक भरत राम यादव ने अदालत के समक्ष मामले से जुड़े साक्ष्य और दलीलें पेश कीं।
कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत माना दोषी
विशेष न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी पाया। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यह फैसला नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराधों में त्वरित जांच, मजबूत साक्ष्य और प्रभावी अभियोजन की भूमिका को भी सामने लाता है।
