अपराध और हादसाछत्तीसगढ़

CG शराब घोटला: CBI ने अरुण पति त्रिपाठी के खिलाफ पहली DA FIR दर्ज की

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आबकारी विशेष सचिव और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के पूर्व प्रबंध संचालक अरुण पति त्रिपाठी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है।

सीबीआई ने 24 मार्च 2026 को दर्ज एफआईआर (RC0592026A0007) में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अवधि 1 फरवरी 2013 से 22 दिसंबर 2023 तक की रखी गई है, जब त्रिपाठी राज्य सरकार में अहम पदों पर रहे।

4.91 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति का आरोप
एफआईआर के अनुसार, अरुण पति त्रिपाठी और उनकी पत्नी मंजुला त्रिपाठी ने अपनी ज्ञात आय से करीब 4.91 करोड़ रुपए अधिक संपत्ति अर्जित की, जो उनकी वैध आय से 54.53% ज्यादा है।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 में उनकी कुल संपत्ति 38.08 लाख रुपए थी, जो 2023 तक बढ़कर 3.32 करोड़ रुपए हो गई। इस दौरान रायपुर और भिलाई में मकान, नवा रायपुर में प्रीमियम प्रॉपर्टी, दुर्ग जिले में जमीन, आभूषण और बैंक बैलेंस सहित कई संपत्तियां खरीदी गईं।

खर्च आय से ज्यादा, जांच में बड़ा खुलासा
सीबीआई की वित्तीय जांच में यह भी सामने आया कि इस अवधि में दंपत्ति की कुल आय करीब 9 करोड़ रुपए थी, जबकि उनका खर्च 10.97 करोड़ रुपए से अधिक रहा। इसमें विदेशी लेन-देन, म्यूचुअल फंड निवेश और निजी खर्च शामिल हैं, जो घोषित आय से मेल नहीं खाते।

ED भी रख रही नजर, बढ़ सकती है जांच
सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है और राज्य की एजेंसियों की कार्रवाई के आधार पर नया केस (ECIR) दर्ज किया जा सकता है। इससे घोटाले के वित्तीय पहलुओं की और गहराई से जांच होने की संभावना है।

कई अधिकारी रडार पर
इस कार्रवाई के बाद तीन दर्जन से अधिक अधिकारी, जिनमें सेवानिवृत्त आईएएस और 29 आबकारी अधिकारी शामिल हैं, जांच के दायरे में आ गए हैं। इससे पहले इन अधिकारियों पर छापेमारी, पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई हो चुकी है।

राज्य की एंटी करप्शन एजेंसी द्वारा पहले दर्ज मामले में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास समेत 70 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

पूरे सिस्टम में फैला था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि आबकारी विभाग के कई स्तरों तक फैला हुआ था। इसमें अतिरिक्त आयुक्त से लेकर जिला और सहायक स्तर के अधिकारी तक शामिल बताए जा रहे हैं।

आगे और कार्रवाई के संकेत
सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार अन्य आरोपियों के खिलाफ भी इसी तरह के आय से अधिक संपत्ति के मामलों की अनुमति देने पर विचार कर रही है, ताकि जांच में एकरूपता बनी रहे।

फिलहाल यह मामला जांच के निर्णायक चरण में पहुंच चुका है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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